संदेश

राजभर जाति का पेसा? राजभर और राजपूत में सम्बंध। भर जाति कौन है पासी जाति का इतिहास

चित्र
इतिहास लेखक : राम दयाल वर्मा जी से समझिए कि भर और राजभर व पासी जाति क्या हैं ? इन्हें कैसे वर्गीकृत किया गया हैं ?  भर और राजभर में अंतर -- इस विषय पर हम पहले ही प्रकाश डाल चुके हैं अगर नये अंतरों के साथ कुछ पुराने अंतरों पर दृष्टिपात पुनः पड़ जाये तो वह स्वाभाविक और स्पष्टता लाने का ही मात्र माध्यम माने,  पुनरावृत्ति दोष है पर क्षम्य है साहित्यिक अवधारणा से यह भर और राजभर का अंतर विविध पुस्तकों  के अनुशीलन के माध्यम से रख रहा हू , विभिन्न शीर्षकों के अंतर्गत ,आप लोग देखें -  नस्ल भेद :   भर लोग द्रविड़ यानी नाग नस्ल के मनुष्य का जातीय समूह हैं,इनकी मध्यम कद काठी है और अधिकतर श्यामल त्वचा वाला समूह है। राजभर :  यह जाति आर्य नस्ल की जाति है, रंग साफ और कद लंबा तथा छरहरा  होता है यह असल भेद दोनों भर और राजभर  को नस्ल के हिसाब से प्रथक प्रथक निर्णीत करता है।  दोनों एक नहीं है नस्ल के अनुसार और राज्यों की सूची के मुताबिक भी -  गोत्र और उत्पत्ति :  भर लोग भारशिव नागों के वंशज हैं और इनका गोत्र पंच करपटी है महाभरत के अन...

प्रकटथन

​प्रकथन ​इतिहास केवल घटनाओं का संकलन नहीं होता, बल्कि वह किसी भी समाज की जड़ों की पहचान होता है। जिस समाज के पास अपना गौरवशाली इतिहास नहीं होता, उसका भविष्य अक्सर दिशाहीन हो जाता है। पासी जाति का इतिहास उत्तर प्रदेश व बिहार के संघर्षशील अध्यायों से जुड़ा है, जिसे दुर्भाग्यवश मुख्यधारा के इतिहासकारों ने वह स्थान नहीं दिया जिसका वह हकदार था। ​इस पुस्तक को लिखने का विचार मेरे मन में तब आया जब मैंने अनुभव किया कि हमारी नई पीढ़ी अपनी गौरवशाली विरासत से अनभिज्ञ होती जा रही है। महाराजा बिजली पासी के किलों की दीवारों से लेकर, 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में वीरांगना ऊदा देवी के अदम्य साहस तक—पासी समाज का योगदान भारतीय मिट्टी के कण-कण में रचा-बसा है।   यह समाज प्राचीन काल से ही रक्षक और योद्धा की भूमिका में रहा है। ​इस शोध यात्रा के दौरान मैंने पाया कि पासी समाज का इतिहास केवल युद्धों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक कुशलता, सामाजिक एकता और अटूट स्वाभिमान की मिसाल है। अवध के मैदानों से लेकर बिहार की सीमाओं तक फैले इस समाज के राजाओं और सेनापतियों ने समय-समय पर अपनी वीरता से विदे...

संडीला निर्माता कौन है

चित्र
सन 1030 ई० में  सैयद सालार मसूद गाजी भारत को लूटने और यहां  इस्लाम धर्म को स्थापित करने के उद्वेश्य से  संपूर्ण भारत को जीतते हुए ये कसमंडी जा पहुंचा कसमंडी में  राजा कंस पासी के सेनाओं और मसूद गाजी के बीच भीषड़ युद्ध हुआ जिसमें सैयद सालार मसूद गाजी के सेनापति हातिम और खातिम मारे गए इस युद्ध में राजा कंश पासी भी वीर गति को प्राप्त हुए  लेखक पद्म श्री योगेश परवीन लिखते पुस्तक लखनऊ के  मोहल्ले और उनकी शान में कंश राज से कसमंडी  मल्लराज से मलिहाबाद  और सल्लराज से संडीला की आबादी आबाद हुई सैयद सालार मसूद गाजी से इन्हीं राजपसियो का सन 1030 मुकाबला हुआ था ! #राजा #कंस #पासी के #दो #बेटे #सलाहिय #मलहिया जो वह किसी तरह बच निकले वह संडीला और मलिहाबाद में स्थापित हो गए  सलाहिय पासी ने हरदोई में संडीला की स्थापना की और मलहिय पासी ने मलीहाबाद की स्थापना की और यहां से शासन सत्ता की बाग़ डोर उन्होंने पुनः अपने हाथों में ले ली योगेश परवीन  अपना लखनऊ में उल्लेख करते है  लखनऊ मलिहाबाद के रजपासियों के बनाए तीर  सारे भारत में मागे जाते थे। इन माह...

महाराजा तिलोक चंद और सलिहा पासी का इतिहास अरख जाति के प्रमाण

नमस्कार दोस्तो यह लेख लिखने का  मकसद किसी की भावनाओ  को आहत करना वा किसी को नीचा दिखाना बिल्कुल नही है समाज में हो रही भ्रांतियों को दूर करना वा समाज को  प्रमाणों के साथ उनका सही इतिहास बताना है यह जानकारी अंग्रेजो द्वारा लिखे गए गजेतियार्स फील्ड इंवेस्टी गेशन सर्वे वा साहित्यकारों द्वारा लिखी गई किताबो पर आधारित है  इस वीडियो के माध्यम से अरख और पासी जाति के बीच हो रही गलत फहमी को दूर करना है तो सबसे पहले महाराजा तिलोक चन्द के बारे में जानना बहुत जरूरी है महाराजा तिलोक चन्द का शासन लगभग 918 ई. में  बहराइच क्षेत्र में था दिल्ली के राजा बिक्रमपाल के खिलाफ एक शक्तिशाली सेना का  गठन किया और विशाल सेना लेकर इंद्रप्रस्थ दिल्ली पर हमला किया और विक्रम पाल को हराकर दिल्ली पर अपना राज्य स्थापित किया दिल्ली से पूरे देश पर शासन किया  ================================ Report of the laind revenue settlement of tha Lucknow district  में कहा जाता है कि तिलोक चंद सूर्य के उपासक थे और बराइच के पास उनके सम्मान में एक सूर्य मंदिर  बनवाया जिसे बालार्क कहा जाता है...

पासी जाति से टूट कर बनी जातिया#bhar_khatik_arakh_subcast_of_pasi

चित्र
पासी जाति की उपजाति वीडियो देखने के लिए लिंक पर किलिक करे  https://youtu.be/xvdZnwpDaVs #पासी_जाति_से_टूट_कर_अलग_हुई_जातिया #टूटी_हुई_उपजातियां #पासी_राजभर_अरख_खटिक_जाति नमस्कार दोस्तों एक बार आपका फिर से स्वागत है दोस्तों पासी जाति के इतिहास के बारे में मै आपको कोई न कोई जानकारी देता रहता हूं दोस्तों ऐसी ही आज आपके सामने जानकारी लेकर आया हु #पासी_जाति_के_उप_जातियों के बारे में  दोस्तों बात की जाय भारत की तो भारत जातियो का देश है  भारत पहले जातियों में बटा है फिर वह जातिया उपजातियों में  बटी है फिर वह उपजातियां भी उपजातियों में बटी है  ___________________________ जहाँ कुछ जातिया अपने इतिहास को जानकर  अपने पूर्वजो पर गर्व करती है  यहाँ तक चमार जाति के लोग भी अपने पूर्वजो का इतिहास जानकर अपनी जाति पर गर्व करते है और इसी कारण दा ग्रेट चमार का मिशन भी चला रहे है जितनी भी चमार ग्रुप की उपजातियां थी घसिया झुसिया मोची जाटव  यह सभी जातिया चमार लिख कर एक हो गयी और इस कारण वहः आज सत्ता की दहलीज तक पहुच गयी  है और इसी तरह यादव कास्ट की जितनी भी उपजातीया...

राजा रामपाल पासी का इतिहास

 दोस्तो आप सभी के बीच एक रोचक जानकारी लेकर आया हूं साथियों चक्रवाती सम्राट महाराजा सातन पासी को तो आप जानते होंगे क्या आप जानते हो उनका नन्हिहाल कहां का था तो जानते है उनके नन्हिहल के बारे में *हसनगंज* से उत्तर लगभग 20 किलो मीटर पर एक मध्यकालीन टीला मौजूद है इस टिल्ले के पूरब *करौंदी* पश्चिम में *कैथन* खेड़ा दक्षिण में *रामपुर* और *जवन* है   इस टिले के चारो तरफ झील बनी हुई थी वर्तमान में झील समाप्त हो गई है महाराजा सातन पासी की माता जी का मायका इसी क्षेत्र का बताया जाता है ऐसा प्रतीत होता है की यह किला महाराजा सातन पासी के नाना के द्वारा निर्मित किया गया था आज भी यह किला टीले के रूप में रामपुर में मौजूद है। इस टिले पर वर्तमान में एक गौशाला निर्मित है  इस क्षेत्र में *महाराजा सातन पासी* के सहयोगी राजा और जयचंद के गंजार युद्ध अभियान में आल्हा ऊदल से भयंकर युद्ध हुआ था  भीषण रक्त पात के बावजूद इस क्षेत्र को पासियो से जीत नही पाए आज भी इस क्षेत्र में खुदाई के वक्त बड़ी मात्रा में पुरानी हड्डियां निकलती है।  _____________________________________ साथियों गांजर ...

राजा बेल्हा पासी का इतिहास,,

प्रतापगढ़ के किवदंतियों में महाराजा बहला पासी को बेल्हा पासी के नाम से जाना जाता है """""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""" साथियों सबसे पहले मै आपको बता देना चाहता हुं 12वि सदी से 13 वी सदी के मध्य तक प्रतापगढ़ वा उससे सटे हुए क्षेत्र में कई पासी राजा राज्य कर रहे थे जो हुंडौर के पासी राजा के नेतृत्व में अपना अपना राज्य चला रहे थे इसका जिक्र """""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""...

जरायम एक्ट पेसा कानून (Criminal tribe act)

चित्र
#क्रिमनल_ट्राइब_एक्ट (जरायम एक्ट पेसा कानून) क्या है अपराध सील जातिया| आज हम बात करेंगे कि अछूत दलित कौन है? और यह लोग दलित कैसे बन गए?  इसकी शुरुआत होती है अंग्रेजों की एक साजिश से।  जिसका नाम है, क्रिमिनल_ट्राइब्स_एक्ट 1871, यदि मैं कहूं ,आपकी पूरी जाति को 80 साल मतलब 3 पीढ़ियों के लिए सामाजिक ढांचे से अलग कर दिया जाए। आपको बहिस्कृत कर दिया जाए तो आपका क्या होगा?  आप आज के दलित बन जाएंगे। अंग्रेजो ने यही किया ।  अंग्रेजों ने 1871 से 1952 तक 200 से अधिक जातियों के 4 करोङ से अधिक लोगों को अपराधी का ठप्पा लगा दिया। और उन्हें समाजिक ढांचे से विमुक्त कर दिया। ये कोई फिल्म की कहानी नहीं बल्कि हकीकत है। ये उन्हीं जातियों के लोग है जो आज खुद को दलित कहते है। इन जातियों के  पूरे समूह को अपराधी घोषित कर दिया गया। इन जातियों के लोग अंग्रेजी प्रशासन की आज्ञा के बिना अपने क्षेत्र से बाहर नही जा सकते थे इन्हें प्रशासन की नज़र में ही रहना पड़ता था। जिससे ये अन्य समाज से धीरे-धीरे अलग होते चले गए। 80 साल का वक़्त मतलब तीन पीढ़ी । जो किसी भी समाज की सभ्यता संस्क्रति औ...

नमस्कार गूगल

नमस्कार गूगल मै रघुनाथ कुमार भारशिव पासी राजवंश ब्लॉग राइटर  मेरा ब्लॉग अनपब्लिक हो गया है जिस कारण मेरे दर्शको को पढ़ने में दिक्कत हो रही है कृपया मेरे ब्लॉग को पब्लिक किया जाय धन्यवाद

वीरांगना ऊदा देवी पासी जयंती #ऊदादेवी_जयंती

चित्र
हर साल की भांति इस साल भी 14 अप्रैल को वीरांगना ऊदादेवी पासी की जयंती सामाजिक संगठनों द्वारा इलाहाबाद ,प्रतापगढ़ ,उन्नाव, हरदोई,  फतेहपुर, लखनऊ, बरबंकी आदि जिलों में धूम धाम से मनाई गई  ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, (इतिहास) वीरांगना उदा देवी पासी का जन्म 1829 पीलीभीत में पासी परिवार में हुआ था। जन्म तिथि अज्ञात है । लेकिन सामाजिक सगठन 14 अप्रैल को जयंती मनाते चले आ रहे हैं भारतीय समाज में पासी विभिन्न जातियों मे एक वीर और आत्मस्वाभिमान जाति है । यह जाति वीर और लड़ाकू जाति के रूप में भी जानी जाती थी. इसी वातावरण में उदा देवी का पालन-पोषण हुआ. जिसे इतिहास की रचना करनी होती है, उसमें कार्यकलाप औरों से न चाहते हुए भी अलग हो ही जाते हैं. जैसे-जैसे उदा बड़ी होती गई, वैसे-वैसे वह अपने हम उम्रों का नेतृत्व करने लगी. सही बात कहने में तो उदा पलभर की भी देर नहीं करती थी. अपनी टोली की रक्षा के लिए तो वह खुद की भी परवाह नहीं करती थी. खेल-खेल में ही तीर चलाना, बिजली की तेजी से भागना उदा के लिए सामान्य बात थी. 17 साल की कच्ची उम्र मे...

उत्तर प्रदेश की 17 उपजातियां किस आधार पर अनुसूचित जाति का दर्जा मांग रही थी

साथियों जब 17 उपजातियां अपने एक समान कुल या वंश वा समान पेसे वाली मूल जाति से जुड़ने वा अनुसूचित जाति में आने के लिए आवाज़ उठा रही थी तब  साथियों लगभग सभी जातियों ने सरकार को अपने अपने जातिय संगठन के लैटर पैड के माध्यम से अवगत कराया था  दोस्तो यह 17 उपजातियां किस आधार पर अनुसूचित जाति में आने के लिए आवाज़ उठा रही थी तो साथियों संजय निषाद जी ने अपने लैटर पैड के माध्यम से बताया था भारत के संविधान का अनुच्छेद 341  दोस्तो भारत के संविधान का अनुच्छेद 341 के खंड 1 के बारे में  भी जान लेते है  आर्टिकल 341 कहता है यदि कोई जाति अनुसूचित जाति में है  और उस क्षेत्र में उससे समंधित कोई जाति या उपजाति  है जिसका मूल सिद्धांत या पेसा उसकी मूल जाति से समंधित है या उसकी उपजाति हो उसे भी अनुसूचित जाति का ही समझा जायेगा यह आदेश है संविधान के अनुच्छेद 341 का इसी अनुच्छेद 341 के कारण वह सभी जातियां अपने अपने स्थार पर सरकार से अपनी मूल जाति से जुड़ने के लिए अनुसूचित जाति में आने के लिए लड़ रही थी लेकिन सरकार इनकी बातों पर ध्यान नहीं देती है  फिर यही 17 उपजातियां एक साथ...

राजा छत्रसाल का इतिहास? पासी जाति के राजा कौन थे? छत्रसाल कौन सी जाति के थे?

चित्र
साथियों इतिहास में छत्रसाल नाम के दो राजाओ का उल्लेख मिलता है। ______________________________ एक छत्रसाल बुंदेलखंड के । सन 1675-1731 रहे है  यह राजा औरंगजेब , छत्रपति शिवाजी के सम कालीन थे और _______________________________ दूसरे छत्रसाल नाम के राजा सन 1325 -1342 ईo में जौराली (जरवल)बहराइच के आसपास के क्षेत्र पर अधिकार था यह गयासुदिन के समकालीन थे   _______________________________ मैं जिस राजा की बात कर रहा हूं वह है  जौराली (जरवल)बहराइच के पासी राजा छत्रसाल  ________________________________ महाराजा छत्रसाल पासी का शासन  जौराली (जरवल)बहराइच में 1325 से 1342 ई० तक रहा इन सत्रह सालो में महाराजा छत्रसाल पासी ने कई गढ़ी वा नगरो का निर्माण कराया ------------------------------------------------ राजा छत्रसाल ने जरौली( जरवल) को अपनी राजधानी बनाया यह कस्बा लखनऊ -बहराइच मार्ग पर लखनऊ से 85 किलो मीटर दूर तथा बहराइच से 47 किलोमीटर दुरी पर स्थित था सम्पूर्ण कस्बे की लंबाई 4 किलोमीटर तथा चौड़ाई 2 किलोमीटर है अभी भी जरवल में पासी राजा छत्रसाल के अनेक ...

*अवध उन्नाव क्षेत्र के भरपासियो का वर्चस्व और उनका गौरव पूर्ण इतिहास*

चित्र
पासी समाज के इतिहास को निरंतर  सरकार वा इतिहासकारो द्वारा छुपाया गया पासियो का इतिहास भी अगर कहीं लिखा हुआ है तो वह सिर्फ राजपूतों के इतिहास को उजागर करने के उद्देश्य से लिखा गया जो हमलावर राजपूत थे उन्हे नायक के रूप में दर्शाया गया है और स्थानीय निवासी पासी जाति को लुटेरा डाकू कहकर सम्बोधित किया गया है यह निंदनीय है (Distic gazetteer ) के अनुसार The family of Rampur - Bichauli or Nandauli belongs to the Bais clan and is said to have been founded by one Dudu Rai of Mainpuri , who , when passing through the pargana at the head of a bridal party , on his way to Itaunja , some seven hundred years ago , was attacked and robbed by the Bhars . He returned with an armed force and defeated the Bhar (Pasi ) *रामपुर-बछौली और नंदौली* का राजपूतों का परिवार बैस कबीले से संबंधित है और कहा जाता है कि इस क्षेत्र में बैंस राजपूतों की स्थापना मैनपुरी के दूदू राय ने की थी,जो एक दुल्हन की डोली लेकर अपने सैनिकों के साथ मुखिया के रूप में परगना से गुजरते समय इटौंजा जा रहे थे, लगभग सात सौ साल ...

पासी जाति के उपनाम । पासी जाति की उपजाति।

पासी जाति के प्रमुख उप नाम,,,,, ,,,,,,,,,,,,,,,,,, भारत वर्ष के धर्माधारित और वर्णाधिरित समाज में जातियों का जमघट   विदेशी विद्वानों के लिए  एक अलग ही अजूबा बना रहा,फिर हर जाति ने अपनी कम से सात उप जातियां भी खोज निकाली। अब उनके उप नाम, से जाति पहचान करना और भी कठिन हो गया है क्योंकि एक उप नाम कयी जातियों में सार्वभौमिक भी है जैसे सिंह  ,वर्मा, चौधरी रावत आदि आदि विविधता मूलक हैं।उप नाम चाभी के गुच्छे के समान होता है जो जाति के ताले को सुरक्षा देकर  सुगमता से खोल सकता है। यहां पर पासी जाति के कुछ उप नामों की संक्षिप्त चर्चा करने का यत्न करेगे ,,, राजवंशी,,,, यह उपजाति पासी जाति की प्राचीनता को प्रदर्शित करती है और भारशिव के साथ शासन कर्ता  के रुप में राजकीय श्रंखला से भी जुड़ी हुई है।शाह जहां पुर, सीतापुर हरदोई में अधिक  प्रचलित हैं। रावत,,,, यह उपजाति भी है उपनाम भी है,पासी समाज की यह उपाधि लखनऊ बाराबंकी उन्नाव में अधिक प्रचलित है इसका अर्थ सरदार होता है।अन्य जाति के लोग भी इस उप नाम का प्रयोग करते पाए जाते हैं।  भार्गव,,,,, यह सरनेम या उप नाम लख...

#वीरांगना_ऊदा_देवी_की_जयंती_और_उनका_इतिहास

चित्र
वीरांगना ऊदा देवी की जयंती को लेकर सामाजिक संगठनों के बीच खींचा तानी क्यूं  ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,  सच" क्या है सच्चाई तो ये है कि समाज के किसी भी बड़े राजनेता ने चाहे वो कांग्रेसी नेता धर्म वीर भारती हो। या फिर बहुजन विचारधारा को बढ़ावा देने वाले नेता राम समूझ पासी हो। या फिर आरके चौधरी हो। इन सभी बड़े नेताओं के द्वारा कभी भी वीरांगना ऊदादेवी पासी की जयंती 30 जून को मनाई ही नही गई नेताओ द्वारा विरागना ऊदादेवी की जयंती न मनाने तक तो ठीक था। लेकिन तमाम पासी जाति के सामाजिक इतिहासकार चाहे वो। इतिहासकार राजकुमार पासी हो। या फिर इतिहासकार आर डी रावत निर्मोही हो। या फिर इतिहासकार के०के० रावत हो। या फिर इतिहासकार रामदयाल वर्मा जी हो। या कोई अन्य इतिहासकार हो इन सभी लेखकों के द्वारा समाज के उनके छुपे हुए इतिहास को साक्ष्यों के आधार पर अपनी अपनी किताबों में उल्लेख कर समाज को सही इतिहास से प्रचित कराया गया लेकिन किसी भी लेखक ने किसी भी पुस्तक में वीरांगना ऊदादेवी पासी की जयंती 30 जून को नही लिखी गई इससे यह साबित होता है की वीरांगना ऊदा देवी क...

राजभर जाति का इतिहास। पासी जाति का इतिहास। भर पासी कौन सी जाति है

चित्र
भर ही पासी हैं।,,, लग भग सभी विद्वान जिन्होंने भारत में जातिओ पर लेखनी चलाई है या जनगणना आयुक्त में रह कर पुस्तकें लिखी हैं सभी ने एक स्वर से यह स्वीकार किया है कि आधुनिक जाति पासी,ताड़ माली प्राचीन समय की भर या भारशिव जाति है।और जिसका अवध पर शासन रह चुका है। परंतु कुछ मंद बुद्धि और चालाक लोग इस जाति को आए दिन अपमानित करने से नहीं चूकते है,और पासियो की पसीने से उत्पत्ति की रट लगाते रहते हैं। जबकि अपनी जाति राजभर को  भरद्वाज कहीं भर पटवा  आदि बताते रहते हैं ऐसे एकांगी भद्दी सोच वाले वकील को जवाब देना लाजमी हो जाता है  वे यह भी जानें कि भरद्वाज वे थे जो बृहस्पति द्वारा अपनी छोटी भाभी उतथ्य की पत्नी ममता से बलात्कार स्वरूप पैदा हुए थे यह भरद्वाज नाम का अर्थ है। पासी ने कभी यह नहीं कहा कि वह परसुराम  से उत्पन्न है वह तो भृगु से अपनी पैदाइश जरुर कहा, क्यों कि भृगु वरुण सुत और पाश धर है।भरपटवा तो सभी जानते हैं बुन कर या कोरी,धागे से आभूषण गूंथने वाले कहे जाते हैं। चार्ल्स एल्फ्रेड ईलिएट ने क्रोनिकल्स ओफ उन्नाव नामक पुस्तक सन् 1862 मे लिखी थी जिसका अमुक एकांगी चंट वकील गलत ...