प्रकटथन
प्रकथन इतिहास केवल घटनाओं का संकलन नहीं होता, बल्कि वह किसी भी समाज की जड़ों की पहचान होता है। जिस समाज के पास अपना गौरवशाली इतिहास नहीं होता, उसका भविष्य अक्सर दिशाहीन हो जाता है। पासी जाति का इतिहास उत्तर प्रदेश व बिहार के संघर्षशील अध्यायों से जुड़ा है, जिसे दुर्भाग्यवश मुख्यधारा के इतिहासकारों ने वह स्थान नहीं दिया जिसका वह हकदार था। इस पुस्तक को लिखने का विचार मेरे मन में तब आया जब मैंने अनुभव किया कि हमारी नई पीढ़ी अपनी गौरवशाली विरासत से अनभिज्ञ होती जा रही है। महाराजा बिजली पासी के किलों की दीवारों से लेकर, 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में वीरांगना ऊदा देवी के अदम्य साहस तक—पासी समाज का योगदान भारतीय मिट्टी के कण-कण में रचा-बसा है। यह समाज प्राचीन काल से ही रक्षक और योद्धा की भूमिका में रहा है। इस शोध यात्रा के दौरान मैंने पाया कि पासी समाज का इतिहास केवल युद्धों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक कुशलता, सामाजिक एकता और अटूट स्वाभिमान की मिसाल है। अवध के मैदानों से लेकर बिहार की सीमाओं तक फैले इस समाज के राजाओं और सेनापतियों ने समय-समय पर अपनी वीरता से विदे...