वीरांगना उदा देवी पासी जयंती को लेकर कन्फ्यूजन
14 अप्रैल वीरांगना उदा देवी पासी जयंती को लेकर हमारा पासी समाज दो विचारधाराओं में बट गया एक विचार धारा वो रही जो बाबा साहेब की जयंती वाले दिन सिर्फ अंबेडकर जयंती मनाना चाहते थे और विरागना उदा देवी की जयंती का विरोध करते रहे दूसरी विचारधारा ये रही कि बाबा साहेब की जयंती के कारण पासी महापुर्षो का सम्मान नहीं भूलेंगे इस लिए कुछ लोग विरागना उदादेवी और अंबेडकर की संयुक्त जयंती मनाने की घोसडा कर दी एक दूसरे का खूब विरोध हुआ उसके बाद भी कई संगठनो द्वारा 14 अप्रैल को लखनऊ प्रतापगढ़ बाराबंकी प्रयागराज उन्नाव हरदोई में विरागना उदादेवी पासी जयंती मनाई गई जबकि विरागना उदा देवी के वंशजों द्वारा भी इसका विरोध किया गया उन्होंने कहा जब 30 जून 1973 को विरागना उदादेवी की मूर्ति स्थापित हुई थी तो स्थापना दिवस वाले दिन जयंती मनाई जाती है फिर भी बाबा साहेब की जयंती को प्रभावित करने के लिए विरागना उदादेवी जयंती क्यूं मनाई जा रही वही दूसरी तरफ से कहा जाता है की इससे बाबा साहेब की जयंती परभावित नही होगी बल्कि अनुसूचित जाति में और एकता बढ़ेगी ...