राजा छत्रसाल का इतिहास? पासी जाति के राजा कौन थे? छत्रसाल कौन सी जाति के थे?
साथियों इतिहास में छत्रसाल नाम के दो राजाओ का उल्लेख मिलता है।
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एक छत्रसाल बुंदेलखंड के ।
सन 1675-1731 रहे है
यह राजा औरंगजेब , छत्रपति शिवाजी के सम कालीन थे और
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दूसरे छत्रसाल नाम के राजा सन 1325 -1342 ईo में जौराली (जरवल)बहराइच के आसपास के क्षेत्र पर अधिकार था यह गयासुदिन के समकालीन थे
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मैं जिस राजा की बात कर रहा हूं वह है
जौराली (जरवल)बहराइच के पासी राजा छत्रसाल
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महाराजा छत्रसाल पासी का शासन
जौराली (जरवल)बहराइच में 1325 से 1342 ई० तक रहा इन सत्रह सालो में महाराजा छत्रसाल पासी ने कई गढ़ी वा नगरो का निर्माण कराया
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राजा छत्रसाल ने जरौली( जरवल) को अपनी राजधानी बनाया यह कस्बा लखनऊ -बहराइच मार्ग पर लखनऊ से 85 किलो मीटर दूर तथा बहराइच से 47 किलोमीटर दुरी पर स्थित था सम्पूर्ण कस्बे की लंबाई 4 किलोमीटर तथा चौड़ाई 2 किलोमीटर है अभी भी जरवल में पासी राजा छत्रसाल के अनेक भग्नावशेष विद्यमान है
पर वह दिन पर दिन लुप्त होते जा रहे है पड़ोसी राजा पूरनमल द्वारा निर्मित पुरैना (वर्तमान हिश्मपुर)भी राजा छत्रसाल के कब्जे में हो गया था राजा छत्रसाल पासी ने अनेक गढ़ी वा नगरों का निर्माण कराया
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उसी समय तुगलवंश का शासक गायसुदिन दिल्ली पर शासन कर रहा था
गयासुद्दीन तुग़लक़ दिल्ली सल्तनत में तुग़लक़ वंश का शासक था। (1320-1325 ई॰)
8 सितम्बर 1320 को दिल्ली के सिंहासन पर बैठा।
इसे भारत मे तुग़लक़ वंश का संस्थापक भी माना जाता है।
इसने कुल 29 बार मंगोल आक्रमण को विफल किया। सुल्तान बनने से पहले वह क़ुतुबुद्दीन मुबारक़ ख़िलजी के शासन काल में उत्तर-पश्चिमी सीमान्त प्रान्त का शक्तिशाली गर्वनर नियुक्त हुआ था वह दिल्ली सल्तनत का पहला सुल्तान था,
जिसने अपने नाम के साथ 'ग़ाज़ी' शब्द जोड़ा था।
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गायसुदीन अपने राज्य विस्तार में अनेक छोटे बड़े राज्यों पर हमला कर चुका था उनमें से एक राज्य था
जरौली( जरवल) बहराइच
पासी राजा छत्रसाल का।
राजा छत्रसाल के राज्य पर हमला करने के लिए गायसुदिन अपनी सैनिक टुकड़ी लेकर चल पड़ा गयासुदीन के सैनिको ने अचानक उनके राज्य पर आक्रमण कर दिया महाराजा छत्रसाल के बहादुरी के कारण वा सैनको की एकता के कारण गयासुद्दीन का यह हमला विफल हो गया उल्टा उसे ही मुहकी खानी पड़ी लेकिन गायसुदिन इस अपमान का बदला लेने के लिए षड्यंत करता रहा
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एक बार फिर उसने छत्रसाल के राज्य पर हमला करने की योजना बनाई इस बार गायसुदिन खुद नही गया वह जमालुद्दीन के पुत्र सैय्यद जक्रिया को महाराज छत्रसाल को हराने के लिए भेज दिया सैय्यद जक्रिया ने महाराजा छत्रसाल के राज्य पर अचानक हमला कर दिया राजा छत्रसाल पासी ने उसका कड़ा मुकाबला किया लेकिन वह युद्ध हार गए सैय्यद जक्रिया ने उस क्षेत्र पर भयंकर तांडव किया और अपना अधिकार कर लिया सैय्यद जक्रिया को इस जीत की खुसी में गायसुदिन ने 15 हजार बीघा जमीन पुरुस्कार दिया ऐसा कहा जाता है तब से वहाँ कभी दुबारा पासी संगठित और मजबूत नही हो सके (भारत पासी भारशिव)
https://youtu.be/O69A1-8CaP4?feature=shared
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