हर साल की भांति इस साल भी 14 अप्रैल को वीरांगना ऊदादेवी पासी की जयंती सामाजिक संगठनों द्वारा इलाहाबाद ,प्रतापगढ़ ,उन्नाव, हरदोई, फतेहपुर, लखनऊ, बरबंकी आदि जिलों में धूम धाम से मनाई गई ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, (इतिहास) वीरांगना उदा देवी पासी का जन्म 1829 पीलीभीत में पासी परिवार में हुआ था। जन्म तिथि अज्ञात है । लेकिन सामाजिक सगठन 14 अप्रैल को जयंती मनाते चले आ रहे हैं भारतीय समाज में पासी विभिन्न जातियों मे एक वीर और आत्मस्वाभिमान जाति है । यह जाति वीर और लड़ाकू जाति के रूप में भी जानी जाती थी. इसी वातावरण में उदा देवी का पालन-पोषण हुआ. जिसे इतिहास की रचना करनी होती है, उसमें कार्यकलाप औरों से न चाहते हुए भी अलग हो ही जाते हैं. जैसे-जैसे उदा बड़ी होती गई, वैसे-वैसे वह अपने हम उम्रों का नेतृत्व करने लगी. सही बात कहने में तो उदा पलभर की भी देर नहीं करती थी. अपनी टोली की रक्षा के लिए तो वह खुद की भी परवाह नहीं करती थी. खेल-खेल में ही तीर चलाना, बिजली की तेजी से भागना उदा के लिए सामान्य बात थी. 17 साल की कच्ची उम्र मे...