महाराजा तिलोक चंद और सलिहा पासी का इतिहास अरख जाति के प्रमाण

नमस्कार दोस्तो यह लेख लिखने का  मकसद किसी की भावनाओ  को आहत करना वा किसी को नीचा दिखाना बिल्कुल नही है समाज में हो रही भ्रांतियों को दूर करना वा समाज को  प्रमाणों के साथ उनका सही इतिहास बताना है
यह जानकारी अंग्रेजो द्वारा लिखे गए गजेतियार्स फील्ड इंवेस्टी गेशन सर्वे वा साहित्यकारों द्वारा लिखी गई किताबो पर आधारित है 

इस वीडियो के माध्यम से अरख और पासी जाति के बीच हो रही गलत फहमी को दूर करना है
तो सबसे पहले महाराजा तिलोक चन्द के बारे में जानना बहुत जरूरी है

महाराजा तिलोक चन्द का शासन लगभग 918 ई. में  बहराइच क्षेत्र में था दिल्ली के राजा बिक्रमपाल के खिलाफ एक शक्तिशाली सेना का  गठन किया और विशाल सेना लेकर इंद्रप्रस्थ दिल्ली पर हमला किया और विक्रम पाल को हराकर दिल्ली पर अपना राज्य स्थापित किया दिल्ली से पूरे देश पर शासन किया 
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Report of the laind revenue settlement of tha Lucknow district 

में कहा जाता है कि तिलोक चंद सूर्य के उपासक थे और बराइच के पास उनके सम्मान में एक सूर्य मंदिर  बनवाया जिसे बालार्क कहा जाता है, - अर्क संस्कृतिक शब्द है जिसका मतलब सूर्य होता है राजा त्रिलोक चंद्र सूर्य वंशियो की तरह अपने कबीले को एक नया और बेहतर नाम देना चाहते थे। इसलिए उन्होंने अर्कवंश की स्थापना की और अपने नजदीकी परिवार को अर्क-  राजपासी की उपाधि दी
बाद में जब उन्होंने सारी शक्ति खो दी तो वे अपने साथ राजपासी टाइटल जोड़ा उन्होंने राजपासी शब्द के मूल का आविष्कार करने के लिए अपने भर  राजवंश की पुरानी पहचान खो दिया 
इससे यह पता चलता है की अवध में  भर शब्द प्रचलन में समाप्त हो गया पासी शब्द परचलित हुआ

Report of the laind revenue settlement of tha Lucknow district पढ़ने के बाद पता चलता है 
महाराजा तिलोक चन्द भरपासी जाति के थे बाद में उन्होंने सूर्य वंशी राजपूतों की तरह ही अर्कवंश की स्थापना की राजपासी टाइटल को अपने साथ जोड़ा 

इस पुस्तक से ज्ञात होता है की जैसे सूर्य वंशियो का मुख्य टाइटल राजपूत
 है
उसी तरह महाराजा तिलोक चन्द भर जाति के लोगो को 
अर्कवांश की उपाधि दी और राजपासी कहलवाया

वर्तमान समय के भर अरख और पासी  एक ही कुल या वंश वा जाति के है
जिन्हे साविधानिक तरीके से अलग अलग श्रेणी। में वर्गीकृत किया गया
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अरख समूह 
जैसे महाराजा तिलोक चन्द पर दावा करता है

वैसे ही संडीला के निर्माता सालिया पासी पर अर्कवंशी होने का दावा करता है

महाराजा सालिया पासी कौन थे ये जानना भी बहुत जरूरी है  

राजा सालिया पासी कसमंडी के राजा कंस पासी के बेटे थे सालियां ने संडीला में राज्य स्थापित किया उनके भाई मालिया ने मलिहाबाद की स्थापना की  
 
13वीं शताब्दी में दिल्ली के तुर्की  शासकों ने सन्डीला राज्य पर हमला कर दिया। इस युद्ध में पासियो और तुर्की सेनाओं के बीच भीषण युद्ध हुआ
 
गजेटियर ऑफ दी प्रोविंस ऑफ अवध
वाल्यूम 2 एच टू एम
पेज 427

ऐसा कहा जाता है कि यह प्रमुख सीट
अरख और पासियो की थी , और इसकी स्थापना मालिया पासी ने की थी, जिनके भाई थे
सलिया जिन्होंने ने हरदोई में संडीला की स्थापना की।

ब्रिट्स शासन के गजेतियार्स में यह उल्लेख मिलता है संडीला और मलिहाबाद में अरख और पासियो का शासन रहा है इसी कारण अरख लोग  राजा सलीहा पासी पर अपना दावा ठोक देते है जो निराधार है

वैसे तो अरख समूह पासी जाति का ही हिस्सा है इसके अनेक प्रमाण मिलते है उनमें से कुछ प्रमाण आपको दिखाना चाहूंगा
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प्रमाण 1

East India consttutional reforms
Indian franchise committee
Volume 1
1932

पेज 439 पर यह स्वीकार किया गया उस पर बाकायदा लिखा गया 

अराख समूह पासी जनजाति का हिस्सा है और अछूत है। इस समूह को सर रिचर्ड बर्न की सामाजिक वर्गों के वर्गीकरण की तालिका में समूह X में रखा गया है।
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प्रमाण नंबर दो 

People of India,
National series volume 8,
,Communities segments
Synonyms surnames
And title

इसके पेज नंबर 1677 पर 
पासी जाति के सर नेम और उनकी सब कास्ट के बारे में बताया गया है 
पासी जाति के ग्रुप और सब ग्रुप में  कौन कौन सी जाति है 
 ब्याध, गायदुहा, कमानिया, त्रिसुलिया, आरख पासी, बौरासी पासी, गुज्जर पासी, कैथवास पासी,मांगता पासी,राज पासी, ब्रितिहा खटीक ,मोठी, आदि जातियां पासी जाति के  सब कास्ट में है
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प्रमाण नंबर 3
डॉक्टर अंबेडकर सम्पूर्ण वाङ्मय खंड 4
पेज नंबर  222,23 पर आरख जाति के बारे में क्या लिखते है
वह लिखते है

मेरा मतभेद यह है की श्री ब्लांट 110032 की जनसंख्या वाले आरख समूह को  स्प्रश्य मानते है जब की  तथ्य यह है की अरख समूह पासी समुदाय का अंग है।
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प्रमाण 4

गजेटियर ऑफ प्रविंसेस अवध  वाल्यूम 2 एच टू एम 

पेज नंबर 428 पर उल्लेख मिलता है 
दो पासी भाई, मलिया और सलिया, द्वारा
कहा जाता है कि उन्होंने ही हरदोई में मलिहाबाद और संडीला की स्थापना की थी।

इसके थोड़ा नीचे पेज 435 पर पढ़ने पर उल्लेख मिलता है

मलिहाबाद के पश्चिम में थोड़ी दूरी पर इस क्षेत्र पर अरख जनजाति का अधिकार था जो पासियो के समान है
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प्रमाण 5

REPORT
OF THE
LAND REVENUE SETTLEMENT
OF THE
LUCKNOW Distic 

पेज 238 उल्लेख किया गया है
देश के दक्षिणी हिस्से पर परगना मलिहाबाद के कुछ दूरी पर अरख जनजाति का अधिकार था जो पासी जाति से समंधित है
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प्रमाण 6
Ethnographical Hand-book

FOR THE
N.-W. PROVINCES AND OUDH
BY WILLIAM CROOKE, B. A.,

पेज 130 पर
कहा जाता है कि सीतापुर में पासीयो को राजपासी, अरख, 
बचर, मोहिनी और खट्टिक।  नाम से जाना जाता है
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प्रमाण 7

Census of India 1891
Volume  16

पेज नंबर 315
अरख लोग महान पासी जनजाति की एक शाखा है,
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प्रमाण 8
पुस्तक पकी जेठ का गुलमोहर स्मृति कथा
पेज 15

लिखा है 
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में जो गाथाएं प्रचलित है उनसे पता चलता है  की पासी अरख खटीक और पचार एक ही वंश के है
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प्रमाण 9 

पुस्तक 
हिंदू खटीक जाति
लेखक विजय सोनकर शास्त्री

पेज नंबर 300 पर 
लिखते है
अरख इसे पासी या बहेलिया जाति की उपसाखा और पासी की वर्ण शंकर जाति कहते है

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प्रमाण 10

CENSUS OF INDIA 1971 
SERIES I-INDIA 
MONOGRAPH SERIES 
PART 5 
PASI 
(A Scheduled Caste in Uttar Pradesh)

पेज नंबर 6 पर पासी जाति की उपजातियों के बारे में लिखा है 

उत्तर प्रदेश के विभिन्न भागों में फैली पासी की अच्छी तरह से पुनर्गठित उपजातियों के संबंध में निम्नलिखित सहमति बनी:

1. Raj Pasi 2. Kaithwas 3. Baurasi 4, Gujar Pasi 5. Arakh and 6. Mangta or Pas Mangta.
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साथियों ऐसे बहुत से प्रमाण मिलते है  जिसमे लिखा है अरख जाति को पासी जाति का माना जाता है
आप राजनीतिक षड्यांतो में न पड़े संगठित रहे धन्यवाद

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