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29 मार्च 1850 ; विजय दिवस जब पासियो ने अंग्रेजो को दी थीं करारी शिकस्त अंग्रेज भाग खड़े हुए

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31 मार्च 1850 विजय दिवस : राजा गंगाबख्श रावत  ================================== 29 मार्च  सन 1850;   को पासी तालुकेदार गंगा बख्श रावत ने अंग्रेजो को बराबंकी देवा कसिमगंज के निकट भेटई किले के युद्ध में अंग्रेजो को करारी शिकस्त दी थीं , अंग्रेज सेनापति इलडरटोन को मार गिराया , उस युद्ध के याद में पासी समाज उस दिन को विजय दिवस के रुप में 31 मार्च को  याद करता और मनाता है  29 मार्च सन् 1850 : ( विजय दिवस ) 29 मार्च सन् 1850 को झुक रही दोपहरी में अचानक किले की एक रक्षक पासी  टुकड़ी प्रकट हुई जिसने कैप्टन विल्सन की फौज़ पर भंयकर आक्रमण कर दिया  अप्रत्याशित रूप से आई आफत अंग्रेजो को महाकाल के समान लगी ।                 कैप्टन विल्सन की विक्षिप्त अवस्था को देख , नवाबअली की दोनों नाइन पाउण्डर तोपों ने किले पर गोली बारी शुरू कर दी । पश्चिम की ओर से कैप्टन बारलों ने फौरी कार्रवाही के स्वरूप दस गोले चला दिए । कै  बारलों की अग्रिम टुकड़ी के सूबेदार मेजर ने द्वार पर एक बनावटी झपट्टा किया ।    ...

सीतापुर जिले का असली इतिहास [ history of Sitapur district ]

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✅🌿सीतापुर जिले का इतिहास [ History of Sitapur  ] ====================================== #सीतापुर   ✅✅ महाराजा छीता पासी की नगरी ✅✅✅ सीतापुर जिले की जनसंख्या वेबसाइट के अनुसार 4483992 है तहसील 8 है  19 ब्लॉक 27 पोलिस स्टेशन हैं    #History सीतापुर का पुराना नाम छितया पुर था जिसे राजा छीता पासी ने बसाया था क्या आप जानते है ? Ain-i-Akbari के "अनुसार इसका पुराना नाम छितिया पुर था" और लोकमत के अनुसार राजा छीता पासी ने अपने नाम से छितिया पुर नाम का  एक नगर बसाया था जिसके ध्वंसवशेष टीले के रुप मे आज भी देखा जा सकता है जिसे पहले छीता पासी का टीला नाम से जाना जाता था  "अवध गजेटियर" के अनुसार कालांतर में इसका नाम अपभ्रंश होकर सीतापुर हो गया । यानि राजा छीता पासी के नगर का हमे साहित्यिक स्रोत ain- i-akabri  मिलता है जों हमे 16 वी सदी की यहां की भागौलिक इतिहास का बोध कराता है वहीं सीतापुर गजेटियर 1905 के अनुसार 11-12 सदी में पासी यहां बड़े हि शाक्तिशाली बने रहे जिनका अकबर के समय भी यहां स्वतंत्रता देखी गई थीं जो बाद में निरंतर हुऐ विदेशी आक्रमण से पासी ...

पासी राजवंश के राजा इच्चौली पासी का इत्तिहास

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सेनापति इच्चौली पासी एक ऐसे  सेनापति रहे है जिन्होंने अपने संघर्स और तलवार के दम पर सत्ता हासिल की और राजा बने आज मै उसी गुमनाम योद्धा के बारे में जानकारी लेकर आया हूँ जिसका इतिहास बहुत लम्बा रहा है  जिसके जिंदगी में सिर्फ संघर्स ही रहा था जो पहले सेनापति था उसके बाद राजा बना उसके बाद फिर सेनापति बना उसके बाद फिर राजा बना उसके जिंदगी में उतार चढ़ौ आता रहा  =========================== वो है बाराबंकी के साशक  राजा इचौली पासी  इन्हें अन्य कई नामो से भी जाना जाता है  आईने अकबरी में इचौली को इच्ची कहा गया है  इलियट ने इन्हें इन्छि कहा है और मिराते मसौदी में इन्हें इचौली कहा गया है इतिहासकारो का मत है  इचौली पासी प्रतिहारो के राज्य में सेना पति थे  सेनापति इचौली का राज्य तब अस्तित्व में आया  जब कन्नौज से प्रतिहारो का पतन हुआ तब सेनापति इचौली अपने आपको स्वतंत्र राजा घोसित कर दिया  ========================== 17 बार भारत को लूटने वाला लुटेरा महमूद गजनवी लगातर भारत पर आक्रमण करता रहा लगभग 1018 ई में महमूद गजनवी का 12वा ...