संदेश

राजा रामपाल पासी का इतिहास

 दोस्तो आप सभी के बीच एक रोचक जानकारी लेकर आया हूं साथियों चक्रवाती सम्राट महाराजा सातन पासी को तो आप जानते होंगे क्या आप जानते हो उनका नन्हिहाल कहां का था तो जानते है उनके नन्हिहल के बारे में *हसनगंज* से उत्तर लगभग 20 किलो मीटर पर एक मध्यकालीन टीला मौजूद है इस टिल्ले के पूरब *करौंदी* पश्चिम में *कैथन* खेड़ा दक्षिण में *रामपुर* और *जवन* है   इस टिले के चारो तरफ झील बनी हुई थी वर्तमान में झील समाप्त हो गई है महाराजा सातन पासी की माता जी का मायका इसी क्षेत्र का बताया जाता है ऐसा प्रतीत होता है की यह किला महाराजा सातन पासी के नाना के द्वारा निर्मित किया गया था आज भी यह किला टीले के रूप में रामपुर में मौजूद है। इस टिले पर वर्तमान में एक गौशाला निर्मित है  इस क्षेत्र में *महाराजा सातन पासी* के सहयोगी राजा और जयचंद के गंजार युद्ध अभियान में आल्हा ऊदल से भयंकर युद्ध हुआ था  भीषण रक्त पात के बावजूद इस क्षेत्र को पासियो से जीत नही पाए आज भी इस क्षेत्र में खुदाई के वक्त बड़ी मात्रा में पुरानी हड्डियां निकलती है।  _____________________________________ साथियों गांजर ...

राजा बेल्हा पासी का इतिहास,,

प्रतापगढ़ के किवदंतियों में महाराजा बहला पासी को बेल्हा पासी के नाम से जाना जाता है """""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""" साथियों सबसे पहले मै आपको बता देना चाहता हुं 12वि सदी से 13 वी सदी के मध्य तक प्रतापगढ़ वा उससे सटे हुए क्षेत्र में कई पासी राजा राज्य कर रहे थे जो हुंडौर के पासी राजा के नेतृत्व में अपना अपना राज्य चला रहे थे इसका जिक्र """""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""...

जरायम एक्ट पेसा कानून (Criminal tribe act)

चित्र
#क्रिमनल_ट्राइब_एक्ट (जरायम एक्ट पेसा कानून) क्या है अपराध सील जातिया| आज हम बात करेंगे कि अछूत दलित कौन है? और यह लोग दलित कैसे बन गए?  इसकी शुरुआत होती है अंग्रेजों की एक साजिश से।  जिसका नाम है, क्रिमिनल_ट्राइब्स_एक्ट 1871, यदि मैं कहूं ,आपकी पूरी जाति को 80 साल मतलब 3 पीढ़ियों के लिए सामाजिक ढांचे से अलग कर दिया जाए। आपको बहिस्कृत कर दिया जाए तो आपका क्या होगा?  आप आज के दलित बन जाएंगे। अंग्रेजो ने यही किया ।  अंग्रेजों ने 1871 से 1952 तक 200 से अधिक जातियों के 4 करोङ से अधिक लोगों को अपराधी का ठप्पा लगा दिया। और उन्हें समाजिक ढांचे से विमुक्त कर दिया। ये कोई फिल्म की कहानी नहीं बल्कि हकीकत है। ये उन्हीं जातियों के लोग है जो आज खुद को दलित कहते है। इन जातियों के  पूरे समूह को अपराधी घोषित कर दिया गया। इन जातियों के लोग अंग्रेजी प्रशासन की आज्ञा के बिना अपने क्षेत्र से बाहर नही जा सकते थे इन्हें प्रशासन की नज़र में ही रहना पड़ता था। जिससे ये अन्य समाज से धीरे-धीरे अलग होते चले गए। 80 साल का वक़्त मतलब तीन पीढ़ी । जो किसी भी समाज की सभ्यता संस्क्रति औ...

नमस्कार गूगल

नमस्कार गूगल मै रघुनाथ कुमार भारशिव पासी राजवंश ब्लॉग राइटर  मेरा ब्लॉग अनपब्लिक हो गया है जिस कारण मेरे दर्शको को पढ़ने में दिक्कत हो रही है कृपया मेरे ब्लॉग को पब्लिक किया जाय धन्यवाद

वीरांगना ऊदा देवी पासी जयंती #ऊदादेवी_जयंती

चित्र
हर साल की भांति इस साल भी 14 अप्रैल को वीरांगना ऊदादेवी पासी की जयंती सामाजिक संगठनों द्वारा इलाहाबाद ,प्रतापगढ़ ,उन्नाव, हरदोई,  फतेहपुर, लखनऊ, बरबंकी आदि जिलों में धूम धाम से मनाई गई  ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, (इतिहास) वीरांगना उदा देवी पासी का जन्म 1829 पीलीभीत में पासी परिवार में हुआ था। जन्म तिथि अज्ञात है । लेकिन सामाजिक सगठन 14 अप्रैल को जयंती मनाते चले आ रहे हैं भारतीय समाज में पासी विभिन्न जातियों मे एक वीर और आत्मस्वाभिमान जाति है । यह जाति वीर और लड़ाकू जाति के रूप में भी जानी जाती थी. इसी वातावरण में उदा देवी का पालन-पोषण हुआ. जिसे इतिहास की रचना करनी होती है, उसमें कार्यकलाप औरों से न चाहते हुए भी अलग हो ही जाते हैं. जैसे-जैसे उदा बड़ी होती गई, वैसे-वैसे वह अपने हम उम्रों का नेतृत्व करने लगी. सही बात कहने में तो उदा पलभर की भी देर नहीं करती थी. अपनी टोली की रक्षा के लिए तो वह खुद की भी परवाह नहीं करती थी. खेल-खेल में ही तीर चलाना, बिजली की तेजी से भागना उदा के लिए सामान्य बात थी. 17 साल की कच्ची उम्र मे...

उत्तर प्रदेश की 17 उपजातियां किस आधार पर अनुसूचित जाति का दर्जा मांग रही थी

साथियों जब 17 उपजातियां अपने एक समान कुल या वंश वा समान पेसे वाली मूल जाति से जुड़ने वा अनुसूचित जाति में आने के लिए आवाज़ उठा रही थी तब  साथियों लगभग सभी जातियों ने सरकार को अपने अपने जातिय संगठन के लैटर पैड के माध्यम से अवगत कराया था  दोस्तो यह 17 उपजातियां किस आधार पर अनुसूचित जाति में आने के लिए आवाज़ उठा रही थी तो साथियों संजय निषाद जी ने अपने लैटर पैड के माध्यम से बताया था भारत के संविधान का अनुच्छेद 341  दोस्तो भारत के संविधान का अनुच्छेद 341 के खंड 1 के बारे में  भी जान लेते है  आर्टिकल 341 कहता है यदि कोई जाति अनुसूचित जाति में है  और उस क्षेत्र में उससे समंधित कोई जाति या उपजाति  है जिसका मूल सिद्धांत या पेसा उसकी मूल जाति से समंधित है या उसकी उपजाति हो उसे भी अनुसूचित जाति का ही समझा जायेगा यह आदेश है संविधान के अनुच्छेद 341 का इसी अनुच्छेद 341 के कारण वह सभी जातियां अपने अपने स्थार पर सरकार से अपनी मूल जाति से जुड़ने के लिए अनुसूचित जाति में आने के लिए लड़ रही थी लेकिन सरकार इनकी बातों पर ध्यान नहीं देती है  फिर यही 17 उपजातियां एक साथ...

राजा छत्रसाल का इतिहास? पासी जाति के राजा कौन थे? छत्रसाल कौन सी जाति के थे?

चित्र
साथियों इतिहास में छत्रसाल नाम के दो राजाओ का उल्लेख मिलता है। ______________________________ एक छत्रसाल बुंदेलखंड के । सन 1675-1731 रहे है  यह राजा औरंगजेब , छत्रपति शिवाजी के सम कालीन थे और _______________________________ दूसरे छत्रसाल नाम के राजा सन 1325 -1342 ईo में जौराली (जरवल)बहराइच के आसपास के क्षेत्र पर अधिकार था यह गयासुदिन के समकालीन थे   _______________________________ मैं जिस राजा की बात कर रहा हूं वह है  जौराली (जरवल)बहराइच के पासी राजा छत्रसाल  ________________________________ महाराजा छत्रसाल पासी का शासन  जौराली (जरवल)बहराइच में 1325 से 1342 ई० तक रहा इन सत्रह सालो में महाराजा छत्रसाल पासी ने कई गढ़ी वा नगरो का निर्माण कराया ------------------------------------------------ राजा छत्रसाल ने जरौली( जरवल) को अपनी राजधानी बनाया यह कस्बा लखनऊ -बहराइच मार्ग पर लखनऊ से 85 किलो मीटर दूर तथा बहराइच से 47 किलोमीटर दुरी पर स्थित था सम्पूर्ण कस्बे की लंबाई 4 किलोमीटर तथा चौड़ाई 2 किलोमीटर है अभी भी जरवल में पासी राजा छत्रसाल के अनेक ...