महाराजा सातान पासी का इतिहास महाराजा बिजली पासी #पासी_जाती_का_इतिहास

उन्नाव क्षेत्र के बड़े भू भाग पर राजपासियों का राज्य था। 
उत्तर पश्चिम में राजपासियों की बाहुबली सत्ता स्थापित थी, और बांगरमऊ राजपसियो  का प्रमुख केंद्र था। इसी जिले में मशहूर पासी शासक महाराजा सातन  पासी का  राज्य 1150 से 1196 तक रहा राजा सातन पासी का किला सई नदी के पास था
जिसके भग्नावशेष आज भी सातन य संचान कोट में मिलते है।                                                        महाराजा सातन पासी की सत्ता का केन्द्र बागरमऊ था जो उन्नाव जिले में पड़ता है, 
सातन कोट  महाराजा सातन पासी के नाम से प्रसिद्ध था महाराजा सातन पासी तथा महाराजा बिजली पासी दोनों मित्र थे। जयचंद ने सोचा कि मुझे राज्य विस्तार करना है 
और राज्य विस्तार के मार्ग में राजा सातन पासी और राजा बिजली पासी रोड़े हैं। अतः जयचंद ने सबसे पहले महाराजा सातन पासी  के किले सातन कोट पर आक्रमण कर दिया सातन पासी और जयचन्द के बीच घमासान युद्ध हुआ और जयचंद की सेनाओं को भागना पड़ा। 
ऐसा कहा जाता है कि जयचन्द ने सातन कोट पर लगातार 12 साल तक हमला किया और जयचन्द को हर बार हार का सामना करना पड़ा 

इस अपमान जनक पराजय से जयचंद का मनोबल टूट गया  इसके बाद जयचंद ने कुटिलता पूर्वक एक चाल चली और महोबा के शूरवीर आल्हा ऊदल को 
सातन पासी के किले
 सातन कोट पर हमला करने के लिए उत्प्रेरित किया आल्हा ऊदल गांजर का युद्ध लड़ने के लिए तैयार हो गए 
महोबा और कनौज की विशाल फ़ौज गांजर युद्ध के लिए रवाना हुयी  गांजर क्षेत्र के कई राजाओ को आल्हा ऊदल ने हराया आल्हा ऊदल के विजय रथ को कोई रोक न सका आल्हा ऊदल के फ़ौज बढ़ती हुई  महाराजा सातन पासी के किले  सातन कोट जा पहुँची
 उसी समय काकोरगढ़ के राजा के यहाँ समस्त पासी राजा मीटिंग कर रहे थे काकोरगढ़ में महाराजा सातन पासी और
बिजनौर के राजा  बिजली पासी भी विचार विमर्श करने गये थे।
 उसी समय आल्हा ऊदल ने दूत के द्वारा पत्र  भेजा उस पत्र में  अधीनता स्वीकार करने और  कर देने की बात कही गई
राजा बिजली पासी और महाराजा सातन पासी ने कर देने से मना किया और युद्ध करने की ठानी।
 गांजर के मैदान में  आल्हा ऊदल ने कन्नौज और महोबा की  सेनाएं युद्ध के लिए उतार दी राजा सातन पासी ने भी अपनी सेनाये गांजर के मैदान में उतार दी
लेकिन बिजनौर के राजा बिजली पासी आल्हा ऊदल से युद्ध  करने की ठानी और सातन पासी को युद्ध भूमि में जाने से मना कर दिया बिजली पासी ने कहा एक मित्र के रहते  दूसरा मित्र युद्ध भूमि में जाये ऐसी मित्रता को धिक्कार है महाराजा बिजली पासी और आल्हा ऊदल से 

आमने सामने का युद्ध हुआ इस  युद्ध में भयंकर रक्त पात हुआ इस युद्ध में ऊदल और लाखन बुरी तरह जख्मी हो गये इस युद्ध में आल्हा और उनके बेटे इन्दल ने मोर्चा संभाला और बिजली पासी वीरगति को प्राप्त हुए ये खबर समस्त पासी राजाओ को मिली तो माती के राजा देवा माती कल्ली पश्चिम के राजा कल्याण पासी सातन कोट के राजा सातन पासी अपनी अपनी सेनाये लेकर गांजर के युद्ध भूमि में पहुच गए आल्हा ऊदल ने अपने आपको चारो तरफ घिरता देख  वापस कनौज लौट गए राजा सातन पासी आल्हा के साले जोगा और भोगा को दौड़ा कर मार दिया आल्हा ऊदल को गांजर के युद्ध में निराशा हाँथ लगी गांजर का युद्ध तीन महीना तेरह दिन तक होता रहा।
पासी समाज के संगठनों द्वारा 16 अप्रैल को  किले पर मेले का आयोजन किया जाता है और महाराजा सातन पासी की जयंती मनाई जाती है और भी कई प्रोग्राम किए जाते है मेले वाले दिन दूर दूर से लोग वहां इकठ्ठा होते है  #16_अप्रैल_सातन_पासी_जयंती

महाराजा सातन पासी के प्रमाण उन्नाव गजेटियर और आल्हा खण्ड के बावन लड़ाई में मिलता है

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