बौद्ध की कुरीतियां, क्या पासी राजा बौद्ध धर्म मानते थे
दोस्तों आज मै आपको वो सच्चाई बताऊंगा जिसे देख कर आपको यकीन नही होगा हमारे पासी समाज के कुछ लोग संस्था तो चलाते है पासी जाति के नाम से लेकिन वो काम करते है धर्म परिवर्तन कराने के लिए यही कारण रहा है की पासी समाज शिक्षित नही हो पा रहा सँगठित नही हो पा रहा क्योंकि पासी जाति के बहुत से लोग
पासी जाति के पुरवजो को बुद्धिस्ट बता कर समाज से सच्चाई छिपा रहे है आज मै आपको साक्ष्यों के आधार पर सच्चाई बताऊंगा की क्या कभी पासी पुरवजो ने बौद्ध धर्म सिवकार किया था वो बौद्ध धर्म
जो पाखण्ड और कुरीतियो का जन्म दाता रहा है।
आज मै बौद्ध धर्म के बारे में विस्तार से बताऊंगा उनकी कुरीतियों पर प्रकाश डालूँगा
भारत में बौद्ध धर्म की चार संगत हुई हर संगत में बौद्ध धर्म का विभाजन हुआ संगतो के अतरिक्त भी बौद्ध धर्म का विभाजन हुआ कुल 14 खंडो में बौद्ध धर्म का विभाजन हुआ उनमें से कुछ खंडो का उल्लेख कर रहा हूं जैसे
हीनयान, महायान
वज्रयान- से
सिद्ध पंथ ,बामाचार,
,कापालिक ,तंत्रवाद
थेर पंथ महाथेर,
नाथ पंथ योग पंथ ,
इनके अतिरिक्त बौद्ध धर्म में अन्य कई उपसंप्रदाय या उपवर्ग भी हुए हैं
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पुस्तक ग़दर के फूल लेखक अमृत लाल नागर पेज नम्बर 136 पर लिखते है
अट्ठासी हजार साधुओं का महासम्मेलन हुआ । यह बौद्ध धर्म के पराभव और ब्राह्मण धर्म के पुनर उत्थान का काल था । ब्राह्मणों द्वारा बतलाई गई धार्मिक राह पर चलने वाले राजा - महाराजाओं ने अपार धन दान किया , तब यह महान् साधु सम्मेलन होना संभव हुआ। कुषान राजा जब बौद्ध बन गए तब उन्हें ब्राह्मण - बौद्ध संघर्ष की साम्प्रदायिक आड़ में अपने द्वारा शासित प्रजा पर अधिक अत्याचार करने का बहाना मिल गया । राज्याश्रय पाकर बौद्ध आचार्य , भिक्षुगण बहुत मोटे हो गए थे । साम्प्रदायिक घृणा ने उन्हें संकीर्ण ॥ हृदय वाला बना दिया था । जनता में उनके प्रति आदर नहीं रहा था । ऐसे समय में शिव का भार अपने कन्धे पर उठाकर चलने वाले भारशिव वंशी( पासी) विदेशी महायानी बौद्ध कुषाणो को भारत से खदेड़ - खदेड़ कर बाहर निकाल दिया ।
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बौधों ने महासुख भोगने की आस से स्त्री से सहवास और
नाग, बैल ,गाय आदि जानवर खाना सूरू कर दिया ये जम्मूकश्मीर में नागों की प्रतिमाएं तोड़ने लगे भारत में अनेक नागवंशी जातिया निवास करती है और भारशिवो का नाग चिन्ह रहा है भारशिव वंशी पासीयो का नाम भी नाग से समन्धित हुआ करता था जैसे ,भीम नाग ,नाग सेन , शिव नंदी, आदि
बौधों ने भारशिवो के संस्कृति और सभ्यता को नष्ट करना सूरू कर दिया।
इसी लिए भारशिव पासी राजाओ ने अश्वामेघ यज्ञ किया ब्राह्मणों ने भारशिव पासी राजाओ का गंगा के पवित्र जल से राज्य अभिषेक किया और उन्हें राजपूतो का दर्जा दे दिया भारशिव राजाओ ने ब्राह्मण धर्म की और अग्रसर हुए।
तब भारशिवो ने ब्राह्मणों को सेनापती नियुक्त किया ।
और अनेक नाग जाति के लोगो ने भारशिव पासी राजाओ का समर्थन किया । और बौद्ध धर्म का बहिष्कार किया तब भारशिव पासी राजाओ ने बौधों के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया और महायानी बौद्ध कुषाणों को चीन की सीमा तक खदेड़ दिया
यहीँ से बौद्ध धर्म पतन और पाखण्ड की ओर चल पड़ा
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भारत में सबसे पहले पाषाणी मूर्ति मथुरा में 2000 ईसा पूर्व में बुद्ध की बनी । इसी पाषाण सब्द से पाशंड सब्द बना फिर पाशंड से पाखण्ड सब्द बना जो बौद्ध धर्म के लिए प्रचलित हुआ इसी लिए मुसलमानों ने इन्हें बूत पूजक कहा बूत मतलब बुद्ध भी होता है और पुतला व मूर्ति भी होता है मतलब बुद्ध के मूर्ति की पूजा करने वाले लोग ।
बौद्ध धर्म के बज्रयानी साखा से
बौद्ध धर्म तांत्र वाद की तरफ अग्रसर हो चला अर्थात तांत्रिक रूप धारण किया और मनुष्यों के कपाल में भोजन पका कर खाने लगे तब इन्हें कपालिक भी कहा गया
बौद्ध के बज्रयानी साखा से पाँच ध्यानी बुद्धों और उनकी शक्तियों के अतिरिक्त अनेक बोधिसत्वों की भावना की गई जो सृष्टि का परिचालन करते हैं ।
इन्ही पांच बौद्ध भिक्षु से पंचमकार की व्यख्या हुई मतलब पाँच,म, की व्यख्या हुई इस तरह
(म) मतलब ,,मुंद्रा ,,
(म) मतलब ,,मैथुन,,
(म) मतलब ,,मास,,
(म) मतलब ,,मछली ,,
(म )मतलब ,,मदिरा,,
इनके दोहरे अर्थ है इनके अत्यधिक प्रयोग से बौधो को मक्कार भी कहा गया अर्थात मक्कार शब्द की उत्तपत्ति हुई जो बज्रयानी साखा के बौधों के लिए प्रचलित हुआ
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वज्रयान साखा में ' महासुख' का प्रचलन हुअा । स्त्री के चरम सुख के उपभोग को महासुख की प्राप्ति मानी गई । इसे ही आनंद - स्वरूप ईश्वरत्व समझा ।
बुद्ध धर्म में युगम आनद्ध स्वरूप की भावना चली और इसी कारण उनकी नग्न मूर्तियाँ सहवास की अनेक अश्लील मुद्राओं में बनने लगी,जो कहीं कहीं अब भी मिलती हैं जब कोई धर्म अस्तिव में होता है अर्थात जब किसी धर्म का प्रचलन जोरो पर होता है तब वह अपनी संस्कृति और सभ्यता से दूसरे धर्मों को भी प्रभावित करता है यही कारण रहा की खजराहो के मन्दिरो में सहवास और नग्न अवस्था में मुर्तिया
देखने को मिलती है बौद्ध धर्म की कुरीतियां ब्राह्मण धर्म में भी समाहित हो गयी
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वज्रयानी साखा के बौद्ध के लिए स्त्रियों को लेकर मद्यपान के साथ
अनेक बीभत्स विधान
की साधना के प्रधान स्त्री के अंग थे । सिद्धि प्राप्त करने के लिये मदिरा और किसी स्त्री का योग व सेवन आवश्यक था
इसमें कोई दो रॉय नही है कि जिस समय भारत में मुसलमान आय हुए थे उस समय पूर्वी भागो में बौद्ध धर्म के नाम पर बहुत दुराचार था।
सिद्ध कण्हपा कहते है कि जब तक औरतों का उपभोग न करो तब तक पँचवर्ण की स्त्रियों के साथ विहार क्या करोगे
वज्रयान में महासुख वह दसा बताई गयी है जिसके सादक शून्य में इस प्रकार विलीन हो जाते है जिस प्रकार नमक पानी में विलीन हो जाता है इसका मतलब है कि स्त्री और पुरुष का सालिगंबद्ध योग की भावना की गयी
बौद्ध भिक्षु कान में लकड़ी की मोटी मुद्राए पहनते थे इसी कारण उनके भार से कान फट जाते थे
ये बौद्घ सम्प्रदाय के लोग स्त्री के चर्म सुख की प्राप्ति के लिए सँगठित होकर नदी तलाब और कुआँ के पास डेरा डालने लग गए जब कोई महिला पानी भरने जाती थी तब बौद्ध उनके साथ जबरजस्ती सहवास करते इसी कारण महिलाओं के अंदर उनके प्रति खौप बन गया और जब कोई महिला पानी भरने जाती तो दूसरी महिलाए बोलती कहती थी की बहन वहाँ मत जाओ वहाँ पर कनफटा लोग बैठे होंगे महिलाओं के अंदर इतनी नफरत बढ़ गयी थी बौद्ध भिक्षु के प्रति की क्रोध वस उनका नाम कनफटा दे दिया अर्थात उन्हें कनफटा भी कहा जाने लगा यही सब कुरीतियां देखते हुए भारत में बौद्ध धर्म का पतन हो गया आज की अनुसूचित जाती में चमार ब्राह्मण धर्म को शिवकर करके बौद्ध धर्म का बहिष्कार किया और ब्राह्मणों से भी लंबी चोटी रखना सूरू कर दिया इस तरह भारत से बौद्ध धर्म समाप्त हो गया था जब बाबा साहेब डॉ भीम राव आंबेडकर ने बौद्ध धर्म स्वीकार किया तब चमार जाति के लोगो द्वारा बौद्ध धर्म फिर अपनाया जाने लगा और बौद्ध धर्म का प्रचार प्रसार होने लगा अम्बेडकर के बौद्ध धर्म स्वीकार करने के बाद भारत में फिर से पैर पसारने लगा
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प्रमाण
(1) oude of gazetteer 1877 h.to.m पृष्ठ 98
(2) पुस्तक.ग़दर के फूल
लेखक .अमृत लाल नगर पृष्ठ
136
(3)पुस्तक .हिंदी साहित्य का इत्तिहास
लेखक .रामचन्द्र सुक्ल
पृष्ठ 15,16
(4) पुस्तक.धर्म वीर भारती भाग 9 पृष्ठ 54,56,,,,,,
(5)पुस्तक .भारशिव राजवन्स गौरव
लेखक. इतिहासकार रामदयाल वर्मा
सलग्न करता( भारत पासी भारशिव)
Fake news
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