पासी राजवंश के राजा इच्चौली पासी का इत्तिहास

सेनापति इच्चौली पासी एक ऐसे  सेनापति रहे है जिन्होंने अपने संघर्स और तलवार के दम पर सत्ता हासिल की और राजा बने आज मै उसी गुमनाम योद्धा के बारे में जानकारी लेकर आया हूँ जिसका इतिहास बहुत लम्बा रहा है 
जिसके जिंदगी में सिर्फ संघर्स ही रहा था जो पहले सेनापति था उसके बाद राजा बना उसके बाद फिर सेनापति बना उसके बाद फिर राजा बना उसके जिंदगी में उतार चढ़ौ आता रहा
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वो है बाराबंकी के साशक  राजा इचौली पासी 
इन्हें अन्य कई नामो से भी जाना जाता है 
आईने अकबरी में इचौली को इच्ची कहा गया है 
इलियट ने इन्हें इन्छि कहा है और
मिराते मसौदी में इन्हें इचौली कहा गया है
इतिहासकारो का मत है 
इचौली पासी प्रतिहारो के राज्य में सेना पति थे 
सेनापति इचौली का राज्य तब अस्तित्व में आया 
जब कन्नौज से प्रतिहारो का पतन हुआ तब सेनापति इचौली अपने आपको स्वतंत्र राजा घोसित कर दिया 
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17 बार भारत को लूटने वाला लुटेरा महमूद गजनवी लगातर भारत पर आक्रमण करता रहा
लगभग 1018 ई में महमूद गजनवी का 12वा आक्रमण उत्तर भारत के भीतरी भागो पर हुआ इस आक्रमण में बरान बुलन्दशहर कनौज बाराबंकी भी महमूद गजनवी के चपेट में आ गये 
और इसी समय राजा इचौली पासी का बाराबंकी पर शासन था महमूद गजनवी के हमले में राजा इचौली पासी भी अपना किला हार गए महमूद गजनवी ने इचौल का किला जीत कर सैफुदिन काजी काबिरुदीन को सौंप दिया उन लोगो ने किले को ढहा कर  नए कस्बे का निर्माण किया 
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लंबे समय के बाद एक बार फिर इतिहास ने करवट ली और महाराजा सुहेलदेव पासी के नेतृत्व में यह क्षेत्र फिर से आजाद हुआ 
और महाराजा सुहेलदेव पासी ने  इचौली को अपना सेनापति घोसित कर दिया
इस तरह यह क्षेत्र एक बार फिर सेनापति इचौली पासी को सौंप दिया 
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले का इचौली स्थान पासी राजा इचौली के नाम से ही पड़ा है
मिराते मसूदी में कहा गया है कि इचौली पासी महाराजा सुहेलदेव पासी के सेना नायक थे जिन्हें  महाराजा सुहेलदेव पासी ने  इचौल के किले का सरदार नियुक्त किया था 
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जब महाराजा सुहेलदेव पासी के राज्य की सीमायें नेपाल से लेकर गढ़वाल तक फैली थी तब
सैयद सलार मसूद गाजी 1031 में अपनी विशाल फ़ौज लेकर भारत पर आक्रमण कर दिया 
वह भारत को लूटते हुए अवध तक जा पहुँचा 
अवध में वह श्रवस्ती की ओर बढ़ते समय सर्वप्रथम बाराबंकी में स्थित इचौली पासी के किले पर आक्रमण करने के लिए अपने सेनापति सैफुद्दीन काजी कबिरुद्दीन तथा अन्य सैनिकों को इचौल का किला जितने के लिए भेज दिया 
कबिरुद्दीन ने इचौल के किले पर अचानक हमला कर दिया अचानक हमला देख इचौली पासी अपनी सेना को लेकर युद्ध भूमि में जा डटे भीषण युद्ध हुआ इचौली पासी ने मसूद गाजी के सैनिकों के दाँत खट्टे कर दिए 
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इससे क्रोधित होकर सलार मसूद गाजी ने खुद अपनी सेना के साथ आक्रमण कर दिया
 सेनापति इचौली पासी फिर से मसूद गाजी का मुकाबला किया लेकिन अधिक फ़ौज होने के कारण जख्मी अवस्था में सेनापति इचौली को किले को छोड़ना पड़ा 
और इस तरह एक बार फिर इचौली पासी अपना किला हार गए
सेनापति इचौली श्रावस्ती की ओर जख्मी हालात में कूच कर गये और इचौल पर मसूद गाजी का कब्जा हो गया
इसके पश्चात सैफुद्दीन तथा  हठीला पीर ने भुरैचा दुर्ग पर आक्रमण कर दिया 
जितने भी महाराजा सुहेलदेव पासी के आस पास के किले थे सलार मसूद ने एक के बाद एक सभी किले पर आक्रमण करता रहा और जीतता गया इचौली पासी ने बहराइच पहुँच कर मसूद गाजी के आक्रमण के बारे में महाराजा सुहेलदेव पासी को विस्तार से बताया
महाराजा सुहेलदेव पासी ने अपनी विसाल फ़ौज को लेकर
रणनीति बनाई  और
मसूद गाजी को मारने के लिए चल पड़े सेनापति इचौली अपनी जख्मी हालात में महाराजा सुहेलदेव के साथ युद्ध में चल पड़ा और इचौली पासी ने भिषण युद्ध किया महाराजा सुहेलदेव पासी इचौल के पराक्रम को देख कर बहुत खुश हुए और सलार मसूद गाजी इस युद्ध में मारा गया  महाराजा सुहेलदेव पासी ने इचौली को वहाँ का स्वतंत्र राजा घोसित कर दिया तभी से वह किला इचौल गढ़ य इचौली के नाम से जाना जाने लगा
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आप ऐसे समझ सकते हो प्रतिहारो के राज्य में इचौली पासी सेनापति थे 
प्रतिहारो के राज्य का पतन होंने के बाद राजा बने

राजा बनने के बाद महमूद गजनवी और इचौली पासी का युद्ध हुआ किला हार गए 

उसके बाद सुहेलदेव पासी ने अफगानियों से  किला फिर से जीता और  इचौली पासी को फिर सेना पति बना दिया

उसके बाद सलार मसूद गाजी से  इचौली पासी का युद्ध हुआ और इचौली पासी इचौल का किला फिर हार गए 

सुहेलदेव पासी ने फिर से किला जीता और इचौली पासी को स्वतंत्र राजा घोसित कर दिया
इच्चौली पासी के बारे में इतिहासकार राजकुमार के किताब में भी उलेख मिलता है और भी कई इतिहासकार है जिनकी किताबो में सेनापति इचौली के बारे में लिखा है  सभी भाइयो से एक अपील है इस लेख को ज्यादा से ज्यादा शेयर करे सभी लोग

लेख ( भारत पासी
 भारशिव)
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